कोरियन युद्ध (Korean War in Hindi)- कहाणी अमेरिका कि मनमानी कि

देशभक्ति और War स्टोरीज शृंखला में हम आज आपको एशिया के उन दो देशो के बारे में बताएँगे, जहा के लोग एक ही धर्म के हे, एकही भाषा बोलते हे, और उन्होंने कभी एकदुसरे को अलग नहीं माना था, पर साम्यवाद और पूंजीवाद की लड़ाई में दोनों ६५ सालो से एकदूसरे से युद्ध लड़ रहे हे.

आज हम आपको कोरियन युद्ध के बारे में बताएँगे, इस युद्ध को दुनिया forgotten war के नाम से जानती हे. क्योकि पश्चिमी दुनिया इसे भुला देना चाहती हे, आपको किसी भी war movie में कोरियन युद्ध नहीं देखने को मिलेगा.... क्योकि इसे लगभग भुला दिया गया हे.
आज भी पश्चिमी दुनिया उत्तर कोरिया के शासक का मजाक उड़ाती हे.... उसे एक जुल्मी और सनकी तानाशाह कहती हे.... उत्तर कोरिया को धरती का नरक बताती हे.... तो क्यों दुनिया की Moral Police अमरीका उत्तर कोरिया पर आक्रमण नहीं करती ... जैसा की इसने इराक, अफगानिस्तान, कुवेत, गल्फ और न जाने कहा कहा किया हे....कोरियन युद्ध की सच्चाई क्या हे, ये हम आपको बताएँगे.


Korean War in Hindi
Korea Vs USA

कोरिया के इस कहानी की शुरवात जापान के आक्रमण से होती हे. जब जापान ने १९१० में कोरिया पर आक्रमण कर उसे अपने अधीन कर लिया. जापान के आक्रमण से पहले कोरिया पर कोरियन राजवंश १००० सालो से राज कर रहा था. जापान ने दुसरे महायुद्ध की समाप्ति तक कोरिया बहोत ही अन्यायपूर्ण तरीके से राज जमाये रख्खा जापानियों ने कोरियन लोगो पर अगणित अन्याय किये यहातक कोरियन लडकियों से वैश्याओ की तरह व्यव्हार किया जाता था, और उन्हें Comfort Girl कहा जाता था.
कोरियन युद्ध की बात तब शुरू होती हे, जब दूसरा महायुद्ध अपने अंतिम चरण में था, जर्मनी, इटली आदि देशो ने मित्र राष्ट्रों के सामने घुटने टेक दिए थे, अकेला जापान ही बचा था जिसने अभी घुटने टेके नहीं थे.
.....१९४५ में रशिया ने जापान पर कोरियन peninsula से आक्रमण बोल दिया, और लगभग ७०% कोरियन peninsula पर नियंत्रण कर लिया था. रशिया के आक्रमण के ३ दिनों बाद ही अमेरिका ने जापान पर एटमबम डाल दिया, जापान और मित्र राष्ट्रों में हुए संधि के अनुसार अगले पाच सालो तक कोरिया को दो भागो में बाट दिया गया, और ये तय हुवा की ३८ parallel के उपरी हिस्से पर रशिया तो उसके निचे अमेरिका का नियंत्रण बना रहेगा, और इन पाच सालो में यहा कोरियन लोगो द्वारा निर्वाचन से एक सरकार बनायीं जाएगी, और उसे सत्ता देकर ये दोनों देश वापस चले जायेंगे.
उस समय अमेरिका में डोमिनो theory काफी प्रसिद्ध हुयी थी, इस theory के अनुसार अगर एक देश साम्यवादी हो गया तो, उसके बाजु का देश भी साम्यवादी होने की काफी सम्भावना होती हे, कहा जाता हे रशिया के साम्यवाद के प्रभाव में चीन साम्यवादी हो गया, और रशिया-चीन के प्रभाव में कोरिया और बाद में जापान साम्यवाद की तरफ चले जायेंगे और अगर इस चक्र हो रोकना हो तो हमें किसी भी हालत में कोरिया को साम्यवादी बनाने नहीं देना हे.

१९४८ में एक ऐसी सरकार यो-उन-ह्यांग नेतृत्व में चुन कर भी आई जो पूरी तरह साम्यवादी तो नहीं नहीं कही जा सकती पर साम्यवाद विचारो की तरफ ज़ुकाव रखने वाली थी, पर अमेरिका को कमुनिस्ट विचार वाली सरकार कोरिया में नहीं चाहिए थी, अमेरिका ने इस सरकार को सिर्फ १ महीने तक चलने दिया. कुछ दिनों बाद यो-उन-ह्यांग का सेउल में क़त्ल हो जाता हे.
दक्षिण कोरिया में अमेरिका एक election करवाकर सत्ता स्थापित करवा देता हे, ये निर्वाचन जिस हालत में हुवा वो काफी हद तक संशय के दायरे में हे क्यों-की ६०० से ज्यादा लोग इस निर्वाचन के दौरान मारे जाते हे. वही USSR किम-इल-संग के हाथो में उत्तरी कोरिया की सत्ता को देता हे, पहले USSR चो-मन-सिक को नेता बनाना चाहता था पर किम की लोकप्रियता के कारण बादमें उन्हें किम को सत्ता देनी पड़ी, किम बहोत पहले से कोरियन लोगो का गुरिल्ला दल बना के जापान से छापेमारी का युद्ध लड़ रहे थे.
किम-इल-संग आज के उत्तरी कोरिया के किम-उल-उन के दादा हे, और वे एक राष्ट्रवादी नेता थे, उन्होंने अपने मरते दम तक कोरियन एकता का सपना संजोया था.
१९५० में जब रशिया और अमेरिका कोरिया से निकल गए तो, किम ने कोरियन एकता के लिए दक्षिण कोरिया पर आक्रमण कर दिया, और पुसान शहर को छोड़ सारे कोरिया पर कब्ज़ा कर लेता हे. सेउल को जितने के बाद किम दक्षिण कोरिया के अध्यक्ष श्यांग्मन rhee के पास ३ डिप्लोमेट भेज कर पुरे कोरिया में जनमत संग्रह का प्रस्ताव देता हे, जिसे rhee नामंजूर कर देता हे
कोरिया पर एक साम्यवादी सत्ता का स्थापित होना अमेरिका को कतई मंजूर नहीं था, अमेरिकी फ़ौज मैकआर्थर के नेतृत्व में फिर से एकबार पुसान शहर से कोरिया में घुस जाती हे. अमेरिका सेना अपनी नेवी की सहायता से सेउल जित लेती हे, अमरीकी सेना की तकनिकी और सैन्यक्षमता के आगे उत्तर कोरिया की सेना कड़े संघर्ष के बाद भी टिक नहीं पाती, डॉ महीनो के काल में अमरीकी सेना साम्यवादी कोरियन सेना को चीन की सीमा तक धकेल देती हे.
चीन ने १९४९ में अभीअभी साम्यवादी क्रांति के फलस्वरूप माओ के नेतृत्व में एक साम्यवादी सरकार स्थापन हो चुकी थी, वहा भी अमेरिका का कोमिंगतांग की सरकार को supoort था, और शायद मैकआर्थर चीन पर भी हमला करना चाहता था, क्योंकी UN ने ३८ parallel पर ही उसे रुक जाने के लिए १९५० की पूर्वस्थिति पर रुक जाने के लिए कहा था. जब माओ ने चीनी सीमा पर अमरीकी सेना की हलचल देखि तो, चीनी सेना ने अमरीकी सेना पर आक्रमण कर दिया, लाखो की तादाद में चीनी सैनिक अमरिकियो पर टूट पड़े.
अपनी असीमित सैन्य उपलब्धियों के बाद भी अमरीकी सेना को मुकी खानी पड़ती हे, और १९५१ तक चीनी सेना सेउल जीतकर काफी आगेतक चली जाती हे. पर बाद में ३८ parallel पर नियंत्रण कर १९५० की स्थिति को बनाये रखती हे.

भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहलाल नेहरु की मध्यस्तता के कारन Armistice यानि कुछ समय के लिए युधबंदी होती हे, और दोनों सेनाये LINE OF Control से २-२ किमी पीछे चली जाती हे.
Technicaly देखा जाए तो उत्तर और दक्षिण कोरिया आज भी युद्ध में हे, क्योकि यहाँ temprory युद्धविराम हुवा हे और कोई भी Peace Treaty नहीं हुवी हे.

१९५० के इस युद्ध के बाद किम-उन-संग ने इक आदर्श शासन चलाया, उनकी एक साम्यवादी निति के अनुसार कोरियन लोगो ने आपने देश को आत्मनिर्भर बनाया गया था.... आज भी उत्तर कोरिया न के बराबर चीजो के लिए दुनिया पर depend हे.... १९८० तक की तुलना करे तो उत्तर कोरिया दक्षिण के मुकाबले काफी आगे था....
 वही दूसरी और दक्षिण कोरिया में अमरीका ने काफी बार अपने puppet शासक बिठाये और बदले.... १९७० तक दक्षिण कोरिया दुनिया के बहोत गरीब देशो में से एक था, १९८७ में यहाँ एक Democratic Revolution हुवा जिसमे अमरीका धर्जिनि system की जगह एक सच्चे लोकतंत्र की स्थापना हुयी, तबसे आजतक दक्षिण कोरिया ने काफी तरक्की की हे और आज ये दुनिया के सबसे धनि देशो मेंसे एक बना हे. पर आज भी दक्षिण कोरिया सुरक्षा के लिए अमरीका के ऊपर अवलंबित हे. आज यक़ीनन दक्षिण उत्तर के मुकाबले काफी प्रगत हे.
अगर किसी वक्त ये दोनों एक होगये तो.... ये दुनिया की एक महासत्ता बन जायेंगे... क्यों की एक के पास दुनिया की सबसे खतरनाक सेनाओ में एक सेना हे तो दुसरे के पास दुनिया का सबसे प्रगट विज्ञान.
पर शायद ही ये हो पाए, ...


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